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अनुलोम विलोम के नियम

अनुलोम विलोम के नियम, अर्थ, उपयोग एवं सामान्य सवाल – जवाब

अनुलोम विलोम के नियम: योग एक प्राचीन भारतीय विधि है जो मानव शरीर, मन, और आत्मा को संतुलित करने के लिए जानी जाती है। इसमें कई प्रकार की आसन, प्राणायाम और ध्यान शामिल है, जो संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए किये जाते हैं। इसके अंतर्गत एक ऐसी प्राणायाम तकनीक है जिसे “अनुलोम विलोम” कहा जाता है, जो शरीर और मानसिकता के लिए बहुत फायदेमंद है। इस लेख में, हम अनुलोम विलोम के नियमों, लाभों, और इसके अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देंगे।

अनुलोम विलोम के नियम

अनुलोम विलोम क्या है ?

योग एक प्राचीन तकनीक है जो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास का एक समर्पित प्रणाली है। अनुलोम विलोम या “आल्टर्नेट नोस्ट्रिल ब्रीथिंग” एक प्राणायाम प्रक्रिया है जिसमें दोनों नाकों से सांस लेने और छोड़ने के बारें में है। “अनुलोम” शब्द का अर्थ होता है “अनुक्रमिक” और “विलोम” का अर्थ होता है “विपरीत”। इसका मतलब है कि इस प्राणायाम में हम दोनों नाकों से बारीकी से सांस लेते हैं, यानी एक नाक से और फिर दूसरी नाक से, जिससे सांस का अवलोमन होता है। जिसे अनुलोम विलोम प्राणायाम के नाम से जाना जाता है ।

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अनुलोम विलोम के लाभ

  1. स्वास्थ्य लाभ: अनुलोम विलोम से शरीर में रक्त परिसंचरण बेहतर होता है और श्वासनली की क्षमता में वृद्धि होती है। यह श्वासनली को मजबूती प्रदान करता है जिससे श्वास की प्रक्रिया में सुधार होता है।
  2. तनाव को कम करने में सहायक: अनुलोम विलोम करने से मानसिक तनाव कम होता है और मनश्चित्त को शांति मिलती है। यह मेंटल क्लैरिटी को बढ़ावा देता है और ध्यान क्षमता में सुधार होता है।
  3. एनर्जी बढ़ाने: यह प्राणायाम शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है और नई ताजगी प्रदान करता है। यह दिनभर की थकान को कम करके शरीर को फ्रेशनेस देता है।
  4. अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से हमारे श्वास का संतुलन बनता है, जिससे हमारी आवाज की गहराई बढ़ती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त होता है जो बोलने का पेशा रखते हैं, जैसे कि वक्ता और रेडियो जॉकी।
  5. धर्यवान: अनुलोम विलोम प्राणायाम से धर्य में सुधार होता है जो हमारी शारीरिक क्षमता को बढ़ावा देता है। यह हमें अधिक लम्बे समय तक कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता प्रदान करता है और हमारी डेलिकेट मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
  6. मानसिक चिंताओं का समाधान: अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से हमारी मानसिक स्थिति में सुधार होता है। यह मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है, जिससे मानसिक चिंताएं कम होती हैं और हम अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
  7. एनर्जी की वृद्धि: यह प्राणायाम हमें नई ऊर्जा की प्रदान करता है और हमें दिनभर चुस्त-दुरुस्त रहने में मदद करता है। यह हमारी शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है और हमें थकान से बचाता है।
  8. इम्यूनिटी को मजबूती देने वाला: अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से हमारी इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।
  9. अध्यात्मिक: यह प्राणायाम हमारे मानसिक क्षमता को बढ़ावा देता है और हमें अधिक ध्यानयोग्य बनाता है। यह हमें अपने आसपास के माहौल को अधिक गहराई से अनुभवने की क्षमता प्रदान करता है। जिससे व्यक्ति धार्मिक एवं अध्यात्मिक बनता है ।
  10. रक्तचाप: अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। यह हमारे दिल के स्वास्थ्य को सुधारता है और हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका को कम करता है।

अनुलोम विलोम के नियम

1. शुद्ध और शांत माहौल

अनुलोम विलोम को करते समय, एक शांत और प्राकृतिक माहौल चुनना महत्वपूर्ण है। यह आपके ध्यान को बढ़ावा देता है और प्राणायाम के लाभों को बढाता है । इसलिए अनुलोम विलोम करते समय या तो सुबह ब्रह्म महूर्त का समय चुने या शांत जगह । जिससे आप आसानी से इस प्राणायाम का अभ्यास कर सके ।

2. सही आसन

अनुलोम विलोम करते समय, सही आसन महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि सही आसन रखने से अभ्यास में आसानी होती है ताकि आपके श्वास की प्रवृत्ति सही हो सके। हमेंशा सुखासन, पद्मासन या वज्रासन में आपको बैठना चाहिए ।

3. ध्यान और समर्पण

अनुलोम विलोम को करते समय, ध्यान और समर्पण की भावना से यह क्रिया करनी चाहिए। यह आपके मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।

4. स्थिरता

अनुलोम विलोम करते समय हमेंशा मेरुदंड को सीधी अवस्था में एवं स्थिर रखा जाता है । इस प्राणायाम को करते समय इस नियम का भी पालन साधक द्वारा अवश्य करना चाहिए ।

5. कुम्भक आवश्यक

अनुलोम विलोम करते समय हमेंशा कुम्भक करना चाहिए । एक नासिका से श्वास अन्दर लेने के बाद दूसरी से छोड़ने के पहले कुछ समय के लिए श्वास को अन्दर रोक कर रखा जाता है जिसे कुम्भक कहते है । इस नियम का पालन भी योगी को अपनी सामर्थ्य अनुसार करना आवश्यक है ।

सारांश

अनुलोम विलोम योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकता है। इसे नियमित रूप से अपनाकर आप एक स्वस्थ और स्थिर जीवन जी सकते हैं।

FAQ

  1. क्या मैं अनुलोम विलोम को रोज़ाना कर सकता हूँ? जी हां, आप अनुलोम विलोम को रोज़ाना कर सकते हैं। यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
  2. क्या यह शरीरिक चिकित्सा से जुड़ा है? नहीं, अनुलोम विलोम योग एक प्राकृतिक प्राणायाम है और इसे किसी भी शरीरिक चिकित्सा के साथ सम्बंधित नहीं किया जाता।
  3. क्या यह मुझे मानसिक चिंताओं से निपटने में मदद कर सकता है? हां, अनुलोम विलोम आपके मानसिक स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है और आपको तनाव से राहत दिला सकता है।
  4. क्या अनुलोम विलोम को करते समय शांत वातावरण आवश्यक है? जी हां, अनुलोम विलोम करते समय शांत वातावरण होना अत्यंत आवश्यक है ।
  5. क्या अनुलोम विलोम सभी कर सकते है? जी, अनुलोम विलोम को सभी अपने सामर्थ्य एवं शारीरिक स्थिति अनुसार कुछ समय के लिए कर सकते हैं ।

Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

Written by

Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

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