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नवजीवन रस

नवजीवन रस (Navjivan Rasa): फायदे, सामग्री, नुकसान और खुराक

नवजीवन रस: यह टेबलेट के रूप में आने वाली एक क्लासिकल दवा है । जैसा इसका नाम वैसा काम होता है, यह बीमारी के बाद में आई हुई शारीरिक कमजोरी को दूर करके नया जीवन देने वाली होती है । इसे एंटी एजिंग और मानसिक बिमारियों के लिए भी प्रयोग किया जाता है । आज हम नवजीवन रस के बारे में पूरी जानकारी आप सभी के समक्ष रख रहें है ।

नवजीवन रस

जैसा की आप सभी जानते हैं आयुर्वेद की दवा बहुत ही अच्छी होती हैं और इनका साइड इफेक्ट्स नहीं होता । इसलिए नवजीवन रस आयुर्वेदिक दवा के फायदे में बल्य, नाड़ी संस्थान गत रोगों, यौन दुर्बलता, कामोत्तेजक शक्ति बढ़ाने, दीपन, पाचन, ह्रदय रोग, पेट सम्बन्धी रोगों में लाभदायक परिणाम ले सकते हैं । यहाँ पर हमने नवजीवन रस क्या है? इसके फायदे, निर्माण की सामग्री और खुराक इसके नुकसान आदि की जानकारी विस्तार से देंगे |

नवजीवन रस क्या है ? (What is Navjivan Rasa in Hindi)

यह एक प्रकार की क्लासिकल दवा है जो टेबलेट के रूप में आती है । इस दवा को बहुत सी दवा निर्माता कंपनियां बनाती है । अगर आप ऑनलाइन खोजने जायेंगे तो बाबा रामदेव, व्यास, त्रिफला और डाबर जैसी कंपनियां इसे बनाती हैं । एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के मतानुसार यह शरीर को नया जीवन देने वाली और बीमारी के कारण आई शारीरिक कमजोरी को दूर करने वाली होती है ।

आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार नवजीवन रस रेजुवेनेटिंग, एंटी एजिंग और डायरिया तथा मिर्गी आने में बहुत अच्छा लाभदायक परिणाम होता है । अधिक जानकारी के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़े या आपको हमारे डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए ।

नवजीवन रस के घटक द्रव (Herbal Composition of Navjivana Rasa)

अगर इसके हर्बल कम्पोजिसन की बात करें तो नवजीवन रस में निम्न जड़ी – बूटियां मिली होती हैं –

घटक द्रवमात्राघटक द्रवों के गुण
शुद्ध कुचला10 ग्रामवातनाशक,नाड़ी दौर्बल्यता, वाजीकरण, कुष्ट्घन, दीपन-पाचन,
रस सिंदूर10 ग्रामबल्य,रसायन,वातकफ शामक, वृष्य
लौह भस्म 100 पुटी10 ग्रामरक्तवर्धक, बल्य, रसायन, वृष्य
त्रिकटु10 ग्रामदीपन-पाचन, वातकफशामक, अग्निमांध
अदरक स्वरसआवश्यकतानुसारदीपन-पाचन, अग्निमांध, वातनाशक, कफ शामक

ये उपरोक्त सभी सामग्रियां इसे बनाने में इस्तेमाल होती हैं ।

नवजीवन रस बनाने की विधि

नवजीवन रस का निर्माण करने के लिए सबसे पहले रस सिंदूर को अच्छे से खरल करे उसके बाद सतपूटी लौह भस्म मिलाकर फिर से अच्छे से खरल करे जब दोनों अच्छे से मिल जाये उसके बाद शुद्ध कुचला चूर्ण को मिलाकर फिर से खरल करे | जब अच्छे से खरल हो जाये तो अंत में त्रिकटु चूर्ण मिलाकर अदरक के रस के साथ दो दिनों तक अच्छे से खरल करे | दुसरे दिन खरल करने के बाद 250-250 मिग्रा की गोलियां बनाकर किसी कांच के बर्तन में रख ले | आपका नवजीवन रस बनकर उपयोग हेतु तैयार है – आगे जानोगे नवजीवन रस के फायदे –

नवजीवन रस के फायदे | Benefits and uses of Navjivan Ras in hindi

जैसा की आपने जाना कैसे नवजीवन रस का निर्माण किया जाता है अब आपको बताते है नवजीवन रस को क्यों इतना शक्तिशाली औषधि का दर्जा आयुर्वेद मनीषियों ने दिया होगा जाने नवजीवन रस के फायदे –

नर्वस सिस्टम को सुधारने में नवजीवन रस के फायदे

नवजीवन रस नाड़ी संस्थान के लिए एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है इसका सेवन करने से नाड़ी संस्थानगत रोगों को ठीक करते हुए नई जीवन प्रदान करता है | वर्तमान समय में सर्वाइकल स्लिप डिस्क जैसी समस्याओ में काफी बेहतर परिणाम नवजीवन रस के देखे गये है | स्पाइन सम्बन्धी रोगों में अन्य सहायक औषधियों के रूप में योगेन्द्र रस, चतुर्मुख रस, योगराज गुग्गुल, योगेन्द्र रस, वात चिंतामणि रस, अश्वगंधा, जॉइंट स्टैमिना आदि का सेवन करवाने से अति शीघ्र लाभ मिलता है |

यौनशक्ति वाजीकरण शक्ति बढ़ाने में नवजीवन रस के लाभ

जिन लोगो की मैथुन शक्ति बचपन में की हुई हस्तमैथुन के कारण समाप्त हो चुकी हो ऐसे लोगो के लिए नवजीवन रस एक बेहतर विकल्प है उनकी खोई हुई यौनशक्ति को सुधारने के मददगार साबित होता है | यदि वाजीकरण शक्ति को अधिक बेहतर करना चाहते हो तो आप शुक्र वल्लभ रस , मकरध्वज रस, वसंत कुसुमाकर रस, अश्वगंधा, गोखरू , चन्द्रप्रभा वटी आदि का सेवन करना लाभदायक साबित हो होता है |

मानसिक रोगों में फायदे

जैसा की आपने उपर पढ़ा की नवजीवन रस नर्वस सिस्टम की कमजोरी को सुधारते हुए ठीक करता है ऐसे में मानसिक रोगों में नवजीवन रस के फायदे बहुत ही शानदार देखने को मिलते है | मानसिक रोगों में मुखत: उपयोग की जाने वाली औषधियों का प्रभाव बल्य का कार्य करती है जो बल्य औषधिया होती है वो मेध्य रसायन का काम करती है ऐसे में नवजीवन रस को मानसिक रोगों में आयुर्वेद चिकित्सको द्वारा बहुतायत से उपयोग में लिया जाता है |

वृद्धावस्था में टांगो को मजबूत बनाने में नवजीवन रस के फायदे

अक्सर देखा देखा जाता है की उम्र के साथ साथ टाँगे कमजोर होती जाती है | वृधावस्था में कमजोर हुई टांगो को मजबूत बनाने में नवजीवन रस के फायदे बहुत कम समय में देखने को मिलते है | वृध्दावस्था जन्य कमजोरी में इसका सेवन हीरक प्राश या द्राक्षावलेह के साथ करने से मात्र एक सप्ताह में ही लाभ देखने को मिलता है |

निम्न रक्तचाप में फायदेमंद है नवजीवन रस

उच्च रक्तचाप के साथ साथ निम्न रक्तचाप जैसी बीमारी से लोग परेशान हो रहे है आयुर्वेद में निम्न रक्तचाप के लिए नवजीवन रस एक बेहतर आयुर्वेद दवा है | बीपी लो वाले रोगियों को नवजीवन रस की एक-एक टेबलेट दिन में दो बार सेवन करना चाहिए अधिक समस्या होने पर सुबह 2 टेबलेट शाम को एक टेबलेट का सेवन करने से कुछ ही दिनों में आपको बीपी लो होने की शिकायत से छुटकारा मिल जायेगा | सहायक औषधियों के रूप में अश्वगंधा चूर्ण, नारसिंह चूर्ण, बलारिष्ट, रसराज रस, मकरध्वज रस, योगेन्द्र रस आदि का सेवन किया जा सकता है |

थाइरोइड में नवजीवन रस के फायदे

थाइरोइड रोगियों की अग्निमांध की शिकायत का रहना आम बात है ऐसे में नवजीवन रस दीपन-पाचन गुणों से भरपूर होने से अग्नि को बलवान बनाता है | इसके सेवन से प्राकृतिक थायरोक्सिन का स्त्राव होने लगता है | ध्यान रहे इसके स्तंभक गुण के कारण मल कठोर होने की संभावना होती है ऐसे में इसके साथ आरोग्यवर्दिनी वटी, हरीतकी चूर्ण, या किसी अन्य मृदुविरेचक का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है | अधिक लाभ के लिए सहायक औषधियों के रूप में कांचनार गुग्गुल, वृधिवाधिका वटी, पंचतिक्त गुग्गुल आदि का सेवन किया जा सकता है |

अनिंद्रा में फायदे

जिन लोगो में वात की वृद्धि होने से काफ का हास हो जाता है | कफ हास होने से अनिंद्रा की की शिकायत होना आम बात है ऐसे में वात दोषों के साथ अनिद्रा की शिकायत बढती ही जाती है | ऐसे रोगियों के लिए दूध में घी मिलाकर नवजीवन रस की एक – एक गोली का सेवन करने से अनिंद्रा की शिकायत दूर हो जाती है | नवजीवन रस के साथ सहायक औषधियों के रूप में सारस्वतारिष्ट, सारस्वत चूर्ण का सेवन किया जाना सुरक्षित होता है |

  1. शारीरिक स्वास्थ्य का सुधारना: नवजीवन रस में दीपन और पाचन की गुणकारी विशेषताएं होती हैं, जिससे खाने के पाचन की प्रक्रिया में सुधार होती है और भोजन का पूरी तरह से पाचन होता है।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार: यह किटाणुनाशक और रक्तपौष्टिक गुणकारी होता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है और शारीरिक रूप से मजबूती आती है।
  3. दिल के लिए फायदेमंद: यह ह्रदय को बल देने वाला बेहतरीन टॉनिक है, जिससे ह्रदय के स्वास्थ्य को सुधारने में मदद मिलती है।
  4. शरीरिक बल और ऊर्जा का बढ़ना: नवजीवन रस बल्य और कामोत्तेजक होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और व्यक्ति में ताक़त की वृद्धि होती है।
  5. पाचन क्रिया में सुधार: यह अफरा का नाश करने में मदद करता है और पाचन क्रिया को सुधारता है, जिससे अपचन से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है।
  6. आँतों शुद्धि: नवजीवन रस शरीर की धातु योग्यता को बढ़ावा देता है और आँतों से निष्क्रिय रस-रक्त को बदलकर शरीर को सुद्ध करता है।
  7. मलावरोध का समाधान: नवजीवन रस का सेवन करने से मलावरोध (कब्ज) की समस्या में सुधार हो सकता है और पाचन सिस्टम को स्वस्थ रूप से काम करने में मदद मिलती है।
  8. उदरशुद्धि: यह आमाशय के रसस्त्राव और यकृत्पति के स्त्राव को बढ़ावा देता है, जिससे उदर (पेट) की वायु दूर होती है और मलशुद्धि होने लगती है।
  9. पेट की वायु संगृहीत होने से मुक्ति: नवजीवन रस का सेवन करने से पेट में जमी वायु संगृहीत होने की समस्या में सुधार हो सकता है, जिससे पेट की तकलीफें कम होती हैं।
  10. ज्वर और मंद ज्वर का उपचार: नवजीवन रस का सेवन अपचन पीड़ित व्यक्तियों को मंद ज्वर (बुखार) को दूर करने में मदद कर सकता है और रोज रात्रिकों को आने वाले त्ताप को कम करने में मदद करता है।

खुराक (Dosage)

आमतौर पर इसे एक – एक गोली सुबह – शाम दूध या शहद के साथ प्रयोग किया जाता है । अधिक और प्रमाणित खुराक के लिए आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर इसका सेवन करना चाहिए । हालाँकि रोग के आधार पर स्थति के आधार पर इसकी खुराक कम या ज्यादा किया जा सकता है ।

नुकसान | Side Effects

नवजीवन रस के संभावित प्रतिकूल प्रभाव (Side Effects):

  1. पेट संक्रमण: कुछ लोगों को नवजीवन रस का सेवन करने से पेट संक्रमण या पेट दर्द की समस्या हो सकती है, जो पेट की सही स्वस्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
  2. सिरदर्द: अधिक मात्रा में नवजीवन रस का सेवन करने से सिरदर्द की समस्या हो सकती है, जिससे शरीर में पीड़ा का अनुभव हो सकता है ।
  3. अल्लर्जिक प्रतिक्रिया: कुछ व्यक्तियों को नवजीवन रस के एक या अधिक घटकों के प्रति एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है, जो त्वचा पर चकत्ते, खुजली, या अन्य एलर्जिक संकेतों का कारण बन सकती है।
  4. उबकाई और दर्द: कुछ व्यक्तियों को नवजीवन रस का सेवन करने से उबकाई और पेट में दर्द की समस्या हो सकती है, खासतर जब यह खाली पेट में लिया जाता है।
  5. हृदय संबंधित समस्याएँ: अगर किसी को हृदय संबंधित समस्याएँ हैं, तो नवजीवन रस का अत्यधिक सेवन करने से उनकी स्थिति और भी खराब हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

कृपया ध्यान दें कि यह तभी है जब नवजीवन रस का अत्यधिक सेवन किया जाता है, और यदि कोई व्यक्ति इसे डॉक्टर की सलाह के बिना या उपयोग की सलाह के विपरीत तरीके से सेवन करता है तब नुकसान दिखाई दे सकते हैं । नवजीवन रस का सेवन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श लेना सुरक्षित होता है।

Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

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Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

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