बथुआ का परिचय , औषधिय प्रयोग व बथुआ के फायदे

परिचय :- बथुआ मुख्यत:यूरोप का पोधा माना जाता है किन्तु यह उष्णकटिबंधीय एवं शीतोष्ण जलवायु में पाए जाने के परिणामस्वरूप भारत में भी हिमालय के भागो में बहुतायत से पाया जाता है | भारत के अलावा बथुआ यूरोपीय देशो , एशिया , आस्ट्रेलिया , अमेरिका आदि देशो में भी खूब पाया जाता है |

बथुआ के फायदे

बथुआ का वैज्ञानिक नाम CHENOPODIUM ALBUM LINN है | बथुआ को भाषा व् स्थान विशेष के आधार पर अनेको नामो जैसे – बथुआ , बथुया , क्षारपत्र्म , टांको , चक्रवत्ती , यवशाक , ALLGOOD आदि से जाना पहचाना जाता है |  यह एक छोटा क्षुप नुमा पोधा है , जो बहु आकारीय , सुगन्धरहित सीधा, हरितवर्ण लिए हुए शाकीय क्षुप नुमा होता है | यह रवि की फसल गेहू, सरसों आदि के साथ आसानी से पैदा हो जाता है | कहने में तो यह खरपतवार मात्र ही है किन्तु इसके स्वास्थ्य लाभ अनेक है |

बथुआ में रासायनिक संघटन

बथुआ के पोधे में बीटा-इकडाइसोन , पोलीसोन , पोलिपोडीन – बी , सैपोनिन , क्रिप्टोमेरिडिओल , बीटा-केरोटीन , जैन्थोटोक्सिन , कॉलिन आदि पाये जाते है | बथुआ में विटामिन ए , बी कोम्प्लेक्स , विटामिन सी व अनेको एमिनो एसिड्स , कार्बोहाइड्रेट , रेसे (फाइबर ) , कैल्शियम , लोह – तत्व , फास्फोरस , पोटेशियम , मैगनीज़ आदि बहुतायत मात्रा में पाए जाने से इसके अनेको स्वास्थ्य लाभ है |

बथुआ के फायदे

तो चलिए आज हम आपको बताते है इस औषधीय गुणों से भरपूर घास (जिसे बथुआ कहते है) के विश्वनीय स्वास्थ्य लाभ एवं विभिन्न रोगों में इसके क्या उपयोग है | यह जोड़ो के दर्द, आयरन की कमी, कैल्शियम की कमी एवं माहवारी से सम्बंधित समस्याओं में स्वास्थ्यप्रद औषधि के रूप में कार्य करती है |

आमवात (ARTHRITIS ) में बथुआ के फायदे

बथुआ के पोधे को उखाडकर साफ करने के बाद छोटे छोटे टुकड़े करले व् पानी में डालकर काढ़ा बनाकर जोड़े पर डालने से गठिया से होने वाले दर्द में राहत मिलती है |

रक्तप्रदर पर बथुआ के फायदे

बथुआ की जड़ को पानी या दूध में उबाल कर कुछ दिन सेवन करने से रक्तप्रदर में शीघ्र फलदायक साबित होता है |

नकसीर में बथुआ के फायदे

3 ग्राम की मात्रा में बथुआ के बीज को शहद के साथ सेवन करने से नाक से बहने वाला रक्त बंद हो जाता है |

अग्निमंध में बथुआ के फायदे

बथुआ को उबालकर सेंधा नमक डालकर सेवन करने से मंद हुई अग्नि प्रदीप्त होकर भूख खुलकर लगने लगती है |

स्नायु दोर्बल्य में बथुआ के फायदे

बथुआ को उबालकर गाय के घी में भुनले व् सेंधा नमक डालकर छाछ के साथ सेवन करने से रसायन गुणों की वृद्धि होती है | और शरीर पुष्ट होने लगता है |

पेट के कीड़ो में बथुआ के फायदे

बथुआ के रस में सेंध नमक डाल कर लेने से पेट के कीड़ो से राहत मिलती है |

लीवर रोगों में बथुआ के फायदे

बथुआ की पृकृति शीत होने के कारण यह उष्ण पृकृति के कारण होने वाली लीवर की सुजन में राहत प्रदान करता है |

पथरी में बथुआ के फायदे

बथुआ पर स्वरस को कुछ दिनों तक सेवन करने से पथरी टूट टूट कर पेशाब के साथ साथ बहार निकल जाती है |

बालो की रुसी में बथुआ के फायदे

बथुआ के पञ्चांग को उबालकर बालो को धोने से शिर की जुए व् रुसी से छुटकारा मिल जाता है |

सुजन में बथुआ के फायदे

बथुआ के पत्तो को उबालकर या पीसकर सुजन वाले स्थान पर लगाने से सुजन से राहत मिलती है |

बवासीर में बथुआ के फायदे

बथुआ का साग बनाकर खाने से बवासीर से राहत मिलती है | बथुआ की प्रकृति शीतल होने से यह शीघ्र राहत देता है |

चर्म रोगों में बथुआ के फायदे

बथुआ के रस को एक एक चम्मच नीम के रस के साथ सुबह शाम कुछ दिनों तक सेवन करने से रक्त का शोधन होकर रक्त साफ़ हो जाता है | जिससे स्किन से सम्बंधित रोगों में राहत मिलती है |

एनीमिया में बथुआ के फायदे

बथुआ में प्रचूर मात्रा में आयरन की उपस्थिति हिमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ा देता है जिससे एनीमिया से छुटकारा मिल जाता है |

आँखों के लिए बथुआ के फायदे

बथुआ में विटामिन ए की उपस्थिति आँखों से सम्बंधित रोगों में अत्यंत लाभदायक साबित होता है |

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