जानिए क्या है भीलवाड़ा मॉडल हर कोई जानने का क्यों है इच्छुक

भीलवाड़ा मॉडल

क्या है भीलवाड़ा मॉडल

वर्तमान समय में भीलवाड़ा मॉडल सुर्खियों में बना हुआ है जिसका कारण है भीलवाड़ा जिला कलेक्टर श्री राजेंद्र भट्ट जी जिनकी सुझबुझ के चलते और उनके लम्बे अनुभव के कारण भीलवाड़ा को पूरी दुनिया में उन्होंने मॉडल बना दिया है |

भीलवाड़ा मॉडल
भीलवाड़ा मॉडल

आज दुनिया का प्रत्येक देश भीलवाड़ा मॉडल को जानने का इच्छुक है | और हर कोई देश हो या राज्य सभी भीलवाड़ा मॉडल को अपनाने में ही कोरोना से बचाव का सबसे कारगर उपाय व् समझदारी समझ रहे है |

भीलवाड़ा मॉडल का पहला कदम

5 मार्च को भीलवाड़ा में पहला कोरोना पॉजिटिव केस सामने आने के बाद अगले ही तीन दिनों में 350 मेडिकल टीमो का गठन किया गया | इन गठित की गयी टीमो द्वारा  22 मार्च 2020 तक 56,025 घरो के लगभग 2,80,937 लोगो की स्क्रीनिंग की गयी |

चिकित्सा विभाग द्वारा गठित इन टीमो द्वारा 2250 ऐसे लोगो को चिन्हित किया गया जिनमे संक्रमित होने के लक्षण पाए गये थे | उन्हें बिना किसी देर किये क्वारेंटाइन में रखा गया |

भीलवाड़ा मॉडल का अगला कदम

2250 लोगो में जो लोग पॉजिटिव पाए गये उनसे जुड़े हर व्यक्ति की जांच करवायी गयी | जिनसे वो संक्रमित होने के बाद मिले थे |

भीलवाड़ा मॉडल का अगला कदम

हॉस्पिटल के कर्मचारियों के संक्रमित होने के बाद जिन रोगियों की हिस्ट्री वहा इलाज करवाने की थी उनकी एक सूचि बनाई गयी जिसमे हॉस्पिटल में संक्रमित हुए कर्मचारियों के बाद के दिनों में बागड़ हॉस्पिटल भीलवाड़ा में इलाज के लिए आये रोगी शामिल थे | 22 मार्च तक विभिन्न राज्यों से आये हुए रोगियों की एक सूचि तैयार की गयी जिसमे लगभग 498 लोगो का नाम शामिल था | उन सभी रोगियों के निजी प्रशासन को इस बारे में सूचित किया गया और उन्हें उन्ही के घर में 14 दिनों तक होम क्वारेंटाइन रहने के दिशा-निर्देश दिए गये |

 भीलवाड़ा मॉडल का अगला कदम

22-26 मार्च तक घर घर जाकर स्क्रीनिंग होने के बाद यह तथ्य सामने आता है की लगभग 6445 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते है | ऐसे में चिन्हित किये गये सभी लोगो को होम क्वारेंटाइन में रखा गया |

भीलवाड़ा प्रशासन का महत्वपूर्ण कार्य

22-27 मार्च तक के आधिकारिक दस्तावेजो के आधार पर 22 मार्च से 27 मार्च तक 4.35 लाख घरो के लगभग 22 लाख लोगो का सर्वे किया जाता है | जबकि भीलवाड़ा की अनुमानित आबादी लगभग 30 लाख है |

राज्य सरकार के चिकित्सा विभाग ने GIS (Geographical information system ) एप्प के जरिये पूरी स्थिति पर अपनी नजर बनाई रखी |

सफलता की पहली सीढ़ी – भीलवाड़ा मॉडल

30 मार्च के बाद पॉजिटिव रोगियों की संख्या में गिरावट आने लगती है | और 31 मार्च को भीलवाड़ा में एक भी नया पॉजिटिव मामला सामने नही आया है |

कोरोना पॉजिटिव रोगियों को कोनसी मेडिसिन दी गयी

भीलवाड़ा के कोरोना पॉजिटिव रोगियों के इलाज में hydroxychloroquine(HCQ), Tamifli, hiv Drugs आदि दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है |

इसका परिणाम यह मिलता है की 3 अप्रैल तक 17 लोग रिकवर हो जाते है और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव हो जाती है |

भीलवाड़ा मॉडल की सफलता का मूलमंत्र महाकर्फ्यु

भीलवाड़ाजिले में कोरोना से बचाव के लिए 3 अप्रैल से 13 अप्रैल तक महाकर्फ्यू लगा दिया जाता है | लेकिन ऐसा करने से पहले जिला कलेक्टर भीलवाड़ा श्री राजेन्द्र भट्ट जी अपने कर्मचारियों को निर्देश देते है और डेयरी बुथो पर भेजकर ये जानकारी पता करवाते है की किस घर में कितने दूध की खपत होती है | जिससे लोगो को अधिक असुविधा ना हो | क्योकि महाकर्फ्यु के दौरान घरो से बहार निकलना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाता है और जरूरी समान की दुकानों के खुलने पर भी पाबन्दी लगा दी जाती है |

जरुरी सामानों की घर घर आपूर्ति करवाई

जरूरी आवश्यकता का समान दवाईयों, राशन का समान, दूध आदि प्रशासन घरो तक पहुँचाने लगता है | इसमे पुलिस प्रशासन की बहुत बड़ी भूमिका रहती है | इस दौरान भीलवाड़ा जिले की सभी सीमाए सील कर दी जाती है और किसी भी बहारी व्यक्ति के प्रवेश व निकास पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाता है |

31 मार्च के बाद आज 10 अप्रैल तक सिर्फ 2 केस सामने आये है | इसीलिए भीलवाड़ा मॉडल को पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है | और हर कोई इस मॉडल को जानने का इच्छुक भी है |

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धन्यवाद !

डॉ.रामहरि मीना

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