मिट्टी चिकित्सा (MUD THERAPY IN HINDI )

मिट्टी चिकित्सा

परिचय ( INTRODUCE MUD THERAPY IN HINDI )

“एषा भूतानां पृथ्वी रस:” (छान्दोग्य उपनिषद ) अर्थात पृथ्वी को अन्न भी कहा गया है | मिट्टी चिकित्सा का अपना एक अलग स्वतंत्र इतिहास रहा है | प्राचीन समय से ही मिट्टी चिकित्सा करने के बहुत से प्रमाण मिले है | जिनमे मिट्टी चिकित्सा को सर्वश्रेष्ट चिकित्सा माना गया है |

मिट्टी चिकित्सा

गाँधी युग में भी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के द्वारा मिट्टी चिकित्सा द्वारा अनेको रोगियों का सफल उपचार करने के प्रमाण मिले है | जिस प्रकार कहा जाता है की जल ही जीवन है ठीक उसी प्रकार मिट्टी भी हमारे स्वास्थ्य के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है | प्राकृतिक चिकित्सा में कहा गया है की “मिट्टी पानी धुप हवा सब रोगों की यही दवा” |

प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी चिकित्सा का महत्व

छान्दोग्य उपनिषद् में मिट्टी को अन्य पंचमहाभूतो :- जल , वायु , आकाश तथा अग्नि का सार कहा गया है। स्वास्थ्य सौन्दर्य और स्वास्थ्य दीर्घायु का मिट्टी से गहरा सबंध प्राचीन समय से ही माना जाता रहा है। मिट्टी में अनेक रोगों के निवारण की अद्भुत क्षमता होती है। सामान्य मिट्टी में कुछ औषधीय रासायनिक विश्लेषण इस प्रकार पाए जाते हैं।

सिलिकॉन-27.60%

फास्फोरस-12%

एल्युमीनियम-8.07%

लोहा-5.06%

कैल्शियम-3.64%

सोडियम-2.83%

मैग्नेशियम-2.07%

टाईटेनिक -0.62%

मैगनीज-0.009%

ऑक्सिजन एवं अन्य तत्व -46.46%

▪मिट्टी में अनेकों प्रकार के क्षार , विटामिन्स , खनिज लवण , धातु , रसायन , रत्न , रस आदि की उपस्थिति उसे औषधीय गुणों से परिपूर्ण बनाती है । औषधियां कहां से उत्पन्न है ? जवाब होता है – मिट्टी |  इससे यह स्पष्ट हो जाता है की सभी औषधियों का भंडार मिट्टी ही है । अत: जो तत्व औषधियों में है , उनके परमाणु पहले से ही मिट्टी में उपस्थित रहते है। जो ओषधिय पोधो की उत्पत्ति के समय से ही उनमे उपस्थित रहते है |

ध्यान रहे आप जहां से मिट्टी लें वह स्थान भी साफ सुथरा होना चाहिए किसी कूड़े के ढेर के पास से मिट्टी का संग्रहण कभी न करे । यदि किसी खेत से मिट्टी ली जाए तो एक से तीन फीट गहरा गड्डा खोदकर ही मिटटी को उपयोग में लेना चाहिए।

मिट्टी के प्रकार और औषधीय गुण

सबसे पहले तो हमे यह जान लेना चाहिए कि मिट्टी कई प्रकार की होती है तथा इसके गुण भी अलग-अलग होते हैं। उपयोगिता के दृष्टिकोण सें पहला स्थान काली मिट्टी का है , उसके बाद पीली , सफेद और उसके बाद लाल मिट्टी का स्थान है। मिट्टी के विभिन्न प्रकारों और उनकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर मिट्टी का चयन करना चाहिए। इसके उपयोग के पहले कुछ बातें जरूर ध्यान में रखें |

▪तालाब तथा नदियों के किनारे पाई जाने वाली यह मिट्टी भी काली मिट्टी के समान ही लाभकारी होती है। सफेद मिट्टी से होने वाले लाभ भी पीली मिट्टी के समान ही हैं। लाल मिट्टी पहाड़ों पर मिलती है। इसके लाभ सफेद मिट्टी से कुछ कम होते हैं।

मिट्टी के घोल से चिकित्सा

मिट्टी में पानी की निश्चित मात्रा मिलाकर तैयार घोल का उपयोग चिकित्सा की द्रष्टि से अत्यंत लाभदायक होता है | मिट्टी का घोल तैयार करने से पहले रोग व् रोगी की अवस्थानुसार मिट्टी का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है | मिट्टी चिकित्सा हेतु मिट्टी का घोल तैयार करने के लिए मिट्टी को कम से कम 12 घंटो के लिए भिगोकर रखना अत्यंत आवश्यक है जिससे की मिट्टी के चुम्बकीय गुण अच्छे से सक्रिय हो सके |

काली मिट्टी ( BLACK SOIL IN HINDI )

यह मिट्टी चिकनी और काली होती है। इसके लेप से ठंडक पहुंचती है। साथ ही यह विष के प्रभाव को भी दूर करती है। यह सूजन मिटाकर तकलीफ खत्म कर देती है। जलन होने, घाव होने, विषैले फोड़े तथा चर्मरोग जैसे खाज में काली मिट्टी विशेष रूप से उपयोगी होती है। रक्त के गंदा होने और उसमें विषैले पदार्थों के जमाव को भी यह मिट्टी कम करती है। पेशाब रुकने पर यदि पेड़ू के ऊपर (पेट की नीचे) काली मिट्टी का लेप किया जाता है तो पेशाब की रुकावट समाप्त हो जाती है और वह खुलकर आता है। मधुमक्खी, मकड़ी, बर्रे और बिच्छू के द्वारा डंक मारे जाने पर प्रभावित स्थान पर तुरंत काली मिट्टी का लेप लगाना चाहिए इससे तुरंत लाभ पहुंचता है।

मुल्तानी मिट्टी (MULTANI IN HINDI )

चर्म रोगों जैसे सोराइसिस एक्जिमा आदि में मुल्तानी मिट्टी में कपूर 100 ग्राम मिट्टी में 2 ग्राम कपूर मिलाकर लेप करने से सभी प्रकार के भयंकर चर्म रोगों में शीघ्र लाभकारी साबित होते है | गर्मियों में होने वाली घमौरियों के उपचार में मुल्तानी मिट्टी अचूक औषधि है। शरीर पर इसका पतला-पतला लेप खून की गर्मी को कम करता है। उबटन की तरह मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग सुख और शरीर की कान्ति बढ़ाता है। तेज बुखार में तापमान तुरंत नीचे लाने के लिये सारे शरीर पर इसका मोटा-मोटा लेप करना चाहिए।

  • बलुआ / बालू मिट्टी

बालू मिट्टी में चिकित्सकीय गुणों की भरमार पाई जाती है | शरीर में जब विषैले पदार्थो का जमाव बहुत अधिक हो गया हो तो बालू स्नान से श्रेष्ठ और कोई उपाय नही हो सकता |

  • चिकनी मिट्टी
  • लोम मिट्टी
  • दोमट मिट्टी
  • मटियार मिट्टी
  • गेरुआ/पीली मिट्टी
  • लाल मिट्टी
  • बलुई मिट्टी
  • सफ़ेद मिट्टी
  • दीमक मिट्टी
  • पर्वतीय मिट्टी
  • मृतसागर की मिट्टी
  • चिकित्सा हेतु मिट्टी तैयार करने में सावधानिया

मिट्टी चाहे किसी भी रंग या प्रकार की हो , उसका प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित कर लें कि वह साफ-सुथरी हो, उसमें कंकड़ , पत्थर , तिनके आदि न हों।

जमीन से मिट्टी खोदकर लेते समय पहले मिट्टी को कुछ दिनों के लिए वहीं (खोदे गए स्थान) पर धुप में छोड़ देना चाहिए। जिससे खुली हवा , तेज धूप और चांदनी का सुप्रभाव मिट्टी ग्रहण कर सके, साथ ही उसकी गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी हो सके | ऐसा करने से मिट्टी में यदि कोई हानिकारक पदार्थ सम्मिलित है तो वो भी नष्ट हो जाते है और बेहतर परिणाम मिलते है |

▪ सबसे पहले मिट्टी को कूट कर बारीक करले व प्रयोग से पूर्व मिट्टी को मोटे कपड़े से छानना जरूरी है जिससे कंकड़ , पत्थर आदि निकल जाएं। मिट्टी को हमेशा ताजे ठंडे जल से घोलना चाहिए और उसे कपड़े में लीपकर पट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए । बची हुई मिट्टी को किसी मटके में संभालकर रखना चाहिए ।

▪ लेप तैयार करने के लिए आवश्यकतानुसार मिट्टी को साफ जमीन पर रखना चाहिए। फिर किसी लकड़ी से हिलाते हुए थोड़ा-थोड़ा पानी डालना चाहिए। पट्टी तैयार करने के लिए मिट्टी गूंधे हुए आटे की तुलना में कुछ मुलायम होनी चाहिए। प्राय: लेप बनाते समय जल की मात्रा, मिट्टी की मात्रा की आधी होती है ।

▪ पट्टी तैयार करने के लिए आवश्यकतानुसार साफ कपड़ा लेकर उस पर मिट्टी फैलानी चाहिए । मिट्टी की परत की मोटाई लगभग आधा इंच अवश्य होनी चाहिए । तैयार होने पर पट्टी को सावधानीपूर्वक उठाकर प्रभावित अंग पर लगाना चाहिए ।

▪ पट्टी का प्रयोग पेड़ू या पेट के अलावा किसी और अंग पर करना हो तो भी रोगी का खाली पेट होना लाभदायक होता है । मिट्टी की पट्टी के प्रयोग की अवधि आधा से एक घंटा तक हो सकती है ।

▪ मिट्टी की पट्टी जहां लगाई जाती है, सिर्फ वहीं असर नहीं करती बल्कि पूरे शरीर पर असर करती है, यह शरीर से विषैले ताप खींचकर शरीर से बाहर निकाल देती है ।

▪ प्राय: मिट्टी की पट्टी गर्मियों में गर्मी के प्रभाव को दूर करती है । तेज बुखार को तुरंत काबू करने में इस पट्टी से तुरंत आराम मिलता है । घावों से बहने वाले खून और फोड़े-फुंसियों की जलन शांत करने के लिए भी इस पट्टी का प्रयोग किया जाता है ।

▪ तेज बुखार में रोगी को बेचैनी दूर करने के लिए गीली पट्टी को पेट पर बांधना चाहिए जिसे जल्दी-जल्दी बदलते रहना चाहिए । एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि मलेरिया के बुखार से पहले यदि रोगी की कंपकपी छूट रही हो तो ठंडी पट्टी का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए ।

▪ यदि मिट्टी को लेप उसे गर्म पानी में उबालकर बनाया जाए तो उसके अलग लाभ प्राप्त होते हैं । ऐसे लेप से तैयार की गई पट्टी गरम पट्टी कहलाती है । पट्टी सहने लायक ही गर्म होनी चाहिए ज्यादा नहीं ,  इस पट्टी के ऊपर गरम कपड़ा या फलालैन लपेटना बहुत जरूरी है ।

▪ गर्म पट्टी अमाशय , छोटी आंत , बड़ी आंत आदि की दीवारों के साथ चिपके हुए मल को बाहर निकालने में मदद करती है। इसके लिए इसे पेडू़ पर (नाभि से मूत्रोन्दिय के बीच के स्थान) सहने योग्य गर्म दशा में बांधा जाता है ।

▪ पेट के रोग जैसे पेचिश ,  मरोड़ दर्द , ऐंठन तथा अतिसार होने पर भी पेडू पर यह पट्टी बांधने से लाभ मिलता है । गठिया में भी यह पट्टी बेहद उपयोगी है ।

▪ मासिक धर्म के समय होने वाली पीड़ा भी इस पट्टी को पेड़ू पर बांधने से दूर होती है । गर्भाशय संबंधी समस्त दोषों का निवारण भी इस पट्टी की सहायता से किया जा सकता है । परन्तु गर्भवती स्त्रियों के लिए इसका प्रयोग पूर्णतया वर्जित है ।

▪ त्वचा संबंधी रोगों के निवारण के लिए मिट्टी की सर्वांग मालिश भी बहुत उपयोगी होती है । इसके लिए कपड़े से छानी हुई मिट्टी का समूचे शरीर पर लेप करके केवल दस मिनट धूप में बैठने से त्वचा स्वस्थ, मुलायम और लचकदार बन जाती है । रोम कूप पूरी तरह खुल जाते हैं, फोड़े तथा फुन्सियां नहीं होतीं । इस प्रकार की मालिश से मस्तिष्क संबंधी रोगों के खतरे भी दूर हो जाते हैं । धरती में अनेक औषधीय गुण होते हैं , कमर दर्द , सिरदर्द , सूजन तथा त्वचा संबंधी रोगों के लिए कीचड़ की मालिश भी लाभकारी है । इसके लिए कीचड़ भरे एक आदमकद गड्ढ़े में रोगी को इस प्रकार खड़ा किया जाता है कि उसके कंधों के ऊपर का भाग अर्थात गला, मुंह और सिर कीचड़ के ऊपर रहें। कीचड़ में खड़े रहने के लिए रोगी का वस्त्र उतारना जरूरी है अन्यथा इसका लाभ नहीं मिल पाता। कीचड़ में खड़े रहने की अवधि क्या हो यह रोगी की शारीरिक दशा पर निर्भर करता है। यदि रोगी का शरीर दुर्बल है तो उसे केवल पांच-दस मिनट ,  इसके विपरीत बलवान शरीर वाले रोगियों को तीस मिनट तक कीचड़ में खड़ा रखा जा सकता है।

▪ गर्मी के दिनों में उठने वाली घमौरियां और फुंसियां इससे दूर रहती हैं। सिर के बालों को मुल्तानी मिट्टी से धोने का रिवाज अभी तक मौजूद है। इससे मैल दूर होता है , काले बाल ,  मुलायम ,  मजबूत और चिकने रहते है तथा मस्तिष्क में बड़ी तरावट पहुंचती है । शरीर पर मिट्टी लगाकर स्नान करना एक अच्छा उबटन माना जाता है।

▪ मिट्टी पर नंगे पैर सैर करने से बहुत लाभ होता है। खेतों, नदियों या नहरों के किनारे सूखी या कुछ गीली मिट्टी पर नंगे पैर सैर करने से शरीर में चुस्ती-फुर्ती आ जाती है। इस प्रक्रिया में धरती की उर्जा शरीर को प्राप्त होती है।

▪ मिट्टी के बर्तनों में भोजन पकाना मिट्टी के बर्तनों में पकाया गया भोजन भी स्वास्थ्यवर्धक होता है। मिट्टी के बर्तन में खाद्य-पदार्थ कभी खराब नहीं होता जबकि धातुएं जैसे लोहा, तांबा, पीतल, जिंक आदि के बर्तनों में खाने की चीजें ज्यादा देर रखने से उनमें विष उत्पन्न हो जाते हैं और वह खराब हो जाती हैं ।

मिट्टी मालिश-गीली (MUD MASSAGE IN HINDI )

स्वच्छ व बीमारी से अनुरूप मिट्टी का चयन करने के पश्च्यात नीम के पत्तो को पानी में अच्छे से उबाल ले (पत्तो का रंग भूरा होने तक ) इस उबाले हुए पानी से चयनित की हुई मिट्टी को गुन्थले , मिट्टी को भली प्रकार गूंथने के बाद उसको धीरे धीरे अपने शरीर पर हल्के हाथो से मालिश करे | मिट्टी मालिश से हमारे शरीर से विजातीय द्रव्य आसानी से बहार आजाते है साथ ही त्वचा निखरती है |

मिट्टी गड्डा

मिट्टी गड्ढा मुख्यतः दो प्रकार से किया जाता है |

  1. गीली मिट्टी गड्ढा
  2. सुखी मिट्टी गड्ढा

सम्पूर्ण शरीर से विजातीय द्रव्यों को शरीर से बहार निकालने से बहुत ही आसन सा तरीका होता है मिट्टी गड्ढा स्नान | मिट्टी गड्ढा स्नान के लिए सबसे जरूरी होता है की आप जगह का चयन जहाँ भी कर रहे हो वहा की मिट्टी में किसी भी प्रकार के केमिकल्स का सम्मिश्रण नही होना चाहिए | उसके बाद अपने शरीर के आकर से एक फीट लम्बा , एक फीट चौड़ा और एक से तीन फीट ढलान लिए हुए गहरा गड्ढा तैयार करना होगा | पैरो की और गहरा और सिर की और कम से कम गहरा गड्ढा तैयार करना होता है क्योकि हमारा गर्दन से नीचे का सम्पूर्ण हिस्सा अन्दर रहेगा एवं गर्दन से ऊपर सिर वाला भाग बहार रहेगा | आपका मिट्टी चिकित्सा लेने के लिए गड्ढा तैयार है | अब आपको आपके प्राकृतिक चिकित्सक के बताये अनुसार मिट्टी का चयन करना है -बालू मिट्टी या गीली मिट्टी

मिट्टी पाउडर मालिश (MUD POWDER MASSAGE IN HINDI )

मिट्टी चिकित्सा में मिट्टी मालिश सुखी या बालू का इतिहास आसानी से मिल जाता है जैसा की हम साधुओं को देखते है की वो अपने शरीर पर भस्म की मालिश करके रखते है | वो उनकी प्राकृतिक चिकित्सा ही तो है |

मिट्टी सेक या मिट्टी पोटली मालिश (MUD POTLI MASSAGE IN HINDI )

शरीर के किसी भी प्रकार से होने वाले दर्द खासकर गठिया रोग , आर्थराइटिस , घुटनों का दर्द आदि मी मिट्टी सेक और मिट्टी मालिश का बहुत ही शीघ्र लाभ देखने को मिलता है | मिट्टी सेक या मालिश में लगभग 200 ग्राम बालू मिट्टी व 100 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर किसी कोटन के कपड़े में बांधकर पोटली बनाले | उसके आबाद किसी गर्म पात्र जैसे तवा इत्यादी को गर्म करके उसपर बरी बारी से टिकाकर गर्म कर करके दर्द वाले स्थान पर लगाने से दर्द व् सूजन दोनों में ही शीघ्र लाभ मिलता है |

हर्बल मिट्टी प्रयोग (HERBAL MUD PACK IN HINDI )

उपरोक्त विवरण से यह तो स्पष्ट हो गया है की मिट्टी में सभी प्रकार के गुण विधमान रहते है किन्तु यदि इसे और भी अधिक गुणवान बनाना हो तो हर्बल ओषधियो का पाउडर मिलाकर तैयार करने से इसकी गुणवत्ता और अधिक बढाई जा सकती है | रोगों की अवस्था व् प्रकृति के अनुसार हर्ब्स का निर्धारण करके उपयोग करने से शीघ्र लाभ मिलता है |

मिट्टी में पाया जाने वाले अद्भुत गुण / मिटटी चिकित्सा के फायदे ( MIRACLE BENEFITS OF MUD THERAPY IN HINDI )

  • विधुत चुम्बकीय गुण
  • पित्तोत्सारक
  • तापनियंत्रक
  • दर्दनाशक
  • दुर्गन्धनाशक
  • फंगीनाशक
  • खुजलीनाशक
  • निर्मलकारी गुण
  • आर्तवोत्सारक
  • ज्वरनाशक
  • अवसाद नाशक
  • बेहतरीन एंटीबायोटिक
  • विष-शोषक
  • सर्वभोमिक चिकित्सकीय क्षमता 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *