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चोपचिन्यादि चूर्ण के घटक

चोपचिन्यादि चूर्ण के घटक, उपयोग, बनाने की विधि और खुराक | Chopchinyadi Churna in Hindi

चोपचिन्यादि चूर्ण के घटक: चोपचीनी, पीपल, दालचीनी, पिपलामुल, लवंग, कालीमिर्च, अकरकरा, खुरासानी अजवायन, विडंग, सौंठ और मिश्री इन सभी मसालों को मिलाकर बनने वाली यह एक आयुर्वेदिक दवा है । जिसका इस्तेमाल घावों को ठीक करने, सिर के फोड़े फुंसी, खुजली आदि बीमारियों में लाभदायक मानी जाती है । इसलिए आज के इस लेख में हम आपको चोपचिन्यादी चूर्ण के उपयोग, बनाने की विधि और खुराक आदि की जानकारी देंगे ।

चोपचिन्यादि चूर्ण के घटक

तो चलिए सबसे पहले जान लेते हैं की इसके घटक क्या क्या है ? अर्थात यह कौन – कौनसी जड़ी बूटियों से मिलकर बनती है ।

चोपचिन्यादि चूर्ण के घटक | Ingredients of Chopchinyadi Churna

इसमें निम्न घटक हैं:

  1. चोपचीनी
  2. पीपल
  3. दालचीनी
  4. लौंग
  5. कालीमिर्च
  6. अकरकरा
  7. खुरासानी अजवायन
  8. वायविडंग
  9. सौंठ
  10. मिश्री
  11. पीपलामूल

चोपचिन्यादी चूर्ण क्या है ? | What is Chopchinyadi Churna in Hindi

चोपचिन्यादि चूर्ण एक प्राकृतिक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे विभिन्न औषधिय जड़ी बूटियों के मिश्रण द्वारा तैयार किया जाता है । । इसका प्रमुख उपयोग इंसेक्ट्स, रूमेटॉयड आर्थराइटिस और फोड़े – फुंसियों जैसे रोगों के इलाज में होता है, और यह उत्तर भारत में आमतौर पर प्रयुक्त होता है। इसका निर्माण सही तरीके से करना आवश्यक होता है ताकि इसकी गुणवत्ता, पवित्रता, सुरक्षा, और प्रभावकारिता बनी रहे । इस आयुर्वेदिक दवा का रिफरेन्स योगरत्नाकार आयुर्वेदिक ग्रन्थ से लिया गया है ।

चोपचिन्यादि चूर्ण के उपयोग | Uses of Chopchinyadi Churna

  1. इंसेक्ट्स के इलाज में सहायक: यह चूर्ण इंसेक्ट्स के काटने के बाद उपयोग किया जा सकता है, जिससे दर्द और सूजन को कम किया जाता है.
  2. रूमेटॉयड आर्थराइटिस के इलाज में सहायक: इसे रूमेटॉयड आर्थराइटिस के रोगियों के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, जो जोड़ों के दर्द और सूजन से पीड़ित होते हैं.
  3. गठिया के इलाज में मदद: यह चूर्ण गठिया (जोड़ों में दर्द और सूजन) के इलाज में भी उपयोगी होता है.
  4. प्राकृतिक और सुरक्षित: चोपचिन्यादि चूर्ण एक प्राकृतिक आयुर्वेदिक उपाय है जिसमें प्राकृतिक घटक होते हैं, इसलिए यह सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से इलाज करने के लिए एक विकल्प है.
  5. घावों के उपचार में उपयोगी: चोट आदि के घाव होने पर भी चोपचिन्यादी चूर्ण लाभदायक है । इसका इस्तेमाल करने से लाभ मिलता है ।
  6. स्किन उपचार: त्वचा विकारों में चोपचिन्यादी चूर्ण लाभदायक है । इसे घाव, फोड़े – फुंसी और दूसरी स्किन बिमारियों में प्रयोग करने से लाभ मिलता है ।
  7. इनफर्टिलिटी: यह यौन दुर्बलताओं को कम करने में भी उपयोगी है । पुरुषों में होने वाली इनफर्टिलिटी की समस्या में चोपचिन्यादी चूर्ण लाभदायक है । ऐसा माना जाता है कि इसके सेवन से स्पर्म मोतालिती बढती है ।

खुराक | Dosage

आमतौर पर चोपचिन्यादी चूर्ण का प्रयोग 2 से 5 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम जल के साथ किया जाता है । इसे रोग्नौसर सेवन के लिए आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए ।

नुकसान | Side Effects

सामान्यत: यह आयुर्वेदिक दवा नुकसान रहित है । जैसा हमने आपको चोप चिन्यादी चूर्ण के घटक ऊपर बताएं हैं । ये सभी घटक natural है जिनका सेवन दैनिक जीवन में भी किया जाता है । अत: चोपचिन्यादी चूर्ण के सेवन से कोई भी नुकसान नहीं होता । हालाँकि इसकी खुराक की मात्रा का ध्यान आवश्यक रूप से किया जाना चाहिए । क्योंकि अधिक मात्रा लेना कंही से नुकसान प्रकट कर सकता है । अत: इसे अगर निर्धारित मात्रा में ही सेवन किया जाये तो यह पूर्णत: नुकसान रहित आयुर्वेदिक दवा है ।

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Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

Written by

Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

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