अपने लाइफ पार्टनर को कैसे पहचाने ! आपका रिश्ता लम्बा चलेगा या नही ?

दोस्तों आज हम रिश्तो का मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव दुष्प्रभाव पर चर्चा करेंगे जो की युवाओ के लिए बेहद ही असमंजस का विषय है क्योकि युवावस्था में ही सभी को अपने लाइफ पार्टनर का चयन करना होता है | कुछ वर्ष पहले तक हमारे बुजुर्ग ही युवाओ के लिए लाइफ पार्टनर का चयन करते थे किन्तु वर्तमान समय में युवा खुद ही अपने लाइफ पार्टनर का अपने हिसाब से चयन करने लगे है |

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आज इस आर्टिकल के माध्यम से इस कठिन विषय के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा करेंगे और जानेगे की किस प्रकार इस विषय को आसान बनाया जा सकता है |

प्यार का पहला पड़ाव / कदम

जैसा की आप जानते हो प्रेम का पहला पड़ाव अधिकतर मामलो में इन्सान के रंग रूप से स्टार्ट होता है जो धीरे – धीरे भावनात्मक होता जाता है | इस तरह का प्रेम अधिकतर मामलो में केवल और केवल शारीरिक आपूर्ति तक रह कर ही सिमट जाता है | साथ ही जो रिश्ते रंग रूप के साथ-साथ कम समय में भावनात्मकता का रूप ले लेते है वो लम्बे समय तक चलते है |

जो रिश्ते अल्प समय में बिखर जाते है ऐसे रिश्तो में अधिकांशत: एक व्यक्ति तो भावनात्मक हो जाता है किन्तु दूसरा व्यक्ति केवल और केवल अपनी शारीरिक आपूर्ति होने या करने तक ही रिश्ते को बहुत पहले से ही एक भोग वासना का विषय समझ कर जब तक चले तब तक चलाने में विश्वास रखता है |

ऐसे रिश्तो में जब कोई समस्या आती है तो हर बार किसी एक ही व्यक्ति पर समस्या का समाधान ढूंढने की जिम्मेदारी आती है और दूसरा पार्टनर उस समस्या के समाधान ढूंढने की बजाय अपने आप को बचाने का प्रयास करता है | जैसे ही समस्या का समाधान निकलता है बचने वाला व्यक्ति अपना कुछ मजबूत पक्ष ढ़कते हुए हल निकालने वाले व्यक्ति के सामने बिल्कुल सिद्दत से पहुंच जाता है |

प्रेम का दूसरा पड़ाव

 जो रिश्ते रंग रूप से पहले व्यक्ति के स्वभाव के आधार पर बनते है वो लम्बे समय तक चलते है | इस प्रकार के रिश्तो में दोनों तरफ से भावनात्मक प्रेम जुड़ा हुआ रहता है | इस प्रकार के रिलेशन में जब भी दोनों की लाइफ में कोई समस्या आती है | तो दोनों लाइफ पार्टनर उस समस्या का समाधान करने के लिए एक साथ खड़े होकर या मिलकर समस्या का समाधान ढूंढते है | और ख़ुशी खुशी मिलकर जीवनयापन करते है |

रिलेशनशिप का तीसरा पड़ाव

बुजुर्गो द्वारा जो रिश्ते निर्धारित किये जाते है उनमे यदि फाइनल करने से पहले लडके-लडकी को एक दुसरे को समझने का मौका दिया जाये और उसके बाद रिश्ता फाइनल किया जाये तो इस प्रकार के रिश्ते भी लम्बे समय तक चल सकते है | साथ ही जब लड़का – लडकी मिले तो उन्हें अपने बारे में अच्छी और बुरी आदतों को शेयर कर लेने से रिश्ता ठीक प्रेम करने वाले लोगो की भांति ही लम्बे समय तक चल सकता है |

रिलेशनशिप में रह रहे लोगो की वास्तविकता

रिलेशनशिप या लिव-इन-रिलेशन का बड़ा बोलबाला है | यदि इसका सदुपयोग किया जाये तो शादी के बंधन में बंधने से पहले एक दुसरे पार्टनर को समझने का काफी अच्छा तरीका है किन्तु हमारे यह इसे भी लोगो ने भोग विलाष का रूप दे दिया है क्योकि अधिकतर लोग एक दुसरे की भावनाओ से खेलते है इस रिश्ते की आड़ में |

जब तक सबकुछ ठीक चल रहा होता है तब तक दुनिए के बेहतरीन कपल होने का दिखावा करते रहते है और जब वास्तविकता सामने आती है तो ढांक के तीन पांत ही निकल कर सामने आते है |

अपने लाइफ पार्टनर की वास्तविकता को कैसे पहचाने

यदि आप किसी के साथ रिलेशन में रह रहे हो या किसी के प्रेम की धुन में लीन हो तो आपको अपने लाइफ पार्टनर की वास्तविकता की समय रहते जान लेना आपके भविष्य के लिए और आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी होगा |

यदि आप किसी के साथ लिवइनरिलेशन में रह रहे हो तो विकट परिस्थितियों से बचने के लिए अपने प्रेम रुपी पर्दे से बहार निकलकर अपने पार्टनर को परखने की जरूरत है | जब इन्सान प्रेम रुपी पर्दे की चकाचौंध में रहता है तो उस वक्त अपने लाइफ पार्टनर की हर एक हरकत बड़ी सुंदर लगती है | हर पहलु में अटूट प्रेम ही प्रेम बहता हुआ नजर आता है, कि ये तो मेरे लिए गलत करना तो बहुत दूर की बात है सोच भी नही सकता/सकती किन्तु जब कुछ गलत हो जाता है तब पहले की हुई गलतिया एक-एक करके याद आती है |

वैसे हर कोई ऐसा नही होता है किन्तु एक दुसरे को जानने में कोई बुराई भी नही है |

लॉकडाउन और ब्रेकअप lockdown and breakup in hindi

लॉकडाउन के बाद बहुत से युवाओं के कॉल आये जिनका किसी कारण से अनायास ही एक दुसरो की हरकत कहे या जो पर्दे अपनी झूठ पर डाले हुए थे वो खुल गये | और ब्रेकअप हो गये | नाम किसी का नही लेंगे किन्तु 2-3 लोग तो ऐसे थे उनको उस धोखे के बाद सुसाइड के अलावा जिदगी में कुछ नजर ही नही आ रहा था किन्तु उनकी काउंसलिंग के बाद और उनको ऐसे रिश्तो की हकीकत से वाकिब करवाने के बाद वो सामान्य जिन्दगी जीने लगे है |

यहा पढ़े – प्रेम के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव

ब्रेकअप होने के बाद अपने मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए क्या करे   

जैसा की आप सभी जानते ही हो की आपके आसपास हर दिन किसी ण किसी का ब्रेकअप होता रहता है | जिनमे से कुछ लोग ऐसे होते है जिनको कोई फर्क नही पड़ता है किन्तु दूसरी और कुछ लोगो को जिन्दगी जीने का रास्ता खत्म सा ही लगता है |

ऐसे लोग जिनको सुसाइड करने का मन करता है | और ब्रेकअप होने के बाद जिन्दगी खत्म सी लगने लगे ऐसे लोगो को अपने नजदीकी किसी अच्छे काउंसलर के पास जाके काउंसलिंग करवानी चाहिए साथ ही प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए |

डॉ.रामहरि मीना

ब्रेकअप काउंसलर

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