दमाबेल / दमाबूटी के फायदे और नुकसान

दमाबेल के फायदे

दमाबूटी का पौधा कैसा होता है

दमाबेल लगभग सम्पुर्ण भारत में पाया जाता है |

दमाबेल के फायदे

इसके पत्तो पर फेफड़े के सदृश आकृति भी अक्षर देखने को मिलती साथ ही जिस प्रकार हमारी धमनिया शरीर में मुख्य रूप से फेफड़ो के आसपास की धमनिया होती उसी प्रकार इसके पत्तो पर इसकी आकृति में लिप्त होती है |

दमबेल की पहचान कैसे करे (dambel plant in hindi)

इसके पत्ते उपर की और से हरिताभ वर्ण लिए होते है वही निचे की और से पीताभ रंग लिए होते है | यह एक बेल होती है जिसको अपने विस्तार के लिए किसी अन्य पोधो का सहारा लेना पड़ता है |

भाषा विशेष के आधार पर इसे भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता है | लताक्षीरी, मुलीनी, दमबेल, दमबुटी,खदरि आदि | दमबेल का लैटिन नाम टायलोफोरा इंडिका (Tylophora indica in hindi)  है |

रासायनिक संघठन

इसके पत्तो में स्टिगमेस्टोरोल, इन्डोलीजिडिन, सेरिल एल्कोहल, क्वेरसेटिन, P-मिथाक्सी, बीटा-एमायरिन, जैसे महत्वपूर्ण रसायन मौजूद रहते है |

इसके मूल में टायालोफोरिन, टायालोफोरिनाइन जैसे रासायनिक संघठन पाए जाते है |

गुण-धर्म

रस– मधुर

गुण – दीपन-पाचन

वीर्य – उष्ण

विपाक – कटु

प्रभाव – कफघ्न, शोथघ्न,

दमबेल/ दमाबुटी के औषधीय गुण ( benefits of dmabel plant  in hindi)

दमबेल के औषधीय गुण करे अस्थमा से बचाव

दमबेल में ऐसे औषधीय गुण विधमान रहते है जो अस्थमा का उपचार करने में फायदेमंद साबित होते है | इसके पत्तो में कफशामक गुण होने से कफ को साम्यावस्था में लाकर फेफड़ो में जमा हो रखे अतिरिक्त कफ को खत्म करके बलगम से निजात दिला देता है | दमा या अस्थमा से परेशान रोगी को रोज इसके 2-4 पतों का सेवन करना चाहिए | इनका सेवन सीधे ही चबा चबा कर करने से अधिक लाभ मिलता है | ध्यान रहे इसका सेवन करने के बाद एक घंटे तक कुछ भी नही खाये |

श्वास नली शोथ में दमाबूटी के फायदे

दमबेल के 1-1 पत्तो का 5 दिन तक सेवन करने से श्वास नली की सुजन में आराम मिलने की सम्भावना रहती है |

कुक्कुर खांसी में दमबेल के फायदे

कालीमिर्च 250 मिग्रा, मुलेठी चूर्ण 1 ग्राम, लोंग 5 दमबेल चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से कुक्कुर खांसी में आराम मिलता है |

गर्भाशय के सुजन में दमाबेल के फायदे

दमाबेल पंचांग 5 ग्राम

अजवायन 2 ग्राम

पानी 150 मिली

इन सभी को एक साथ मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भाशय की सुजन में लाभ मिलता है |

वात रोगों में लाभदायक है दमाबुटी

लताक्षीरी अर्थात दमाबेल के पत्तो को पीसकर लगाने से दर्द में आराम मिलता है साथ ही ज्यादा दर्द होने पर इसके पत्तो के तिल का तेल लगाकर हल्का गर्म करके बाँधने से शीघ्र लाभ होने लगता है |

पतंजली दमबेल के नुकसान

  • गर्भवती महिलाओ को इसका सेवन नही करना चाहिए |
  • अधिक मात्रा में सेवन करने से उलटी होने की समस्या, मितली आना जैसी समस्या हो सकती है |
  • जिन लोगो को एलर्जी की समस्या रहती है उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए |
  • लम्बे समय तक इस औषधि का उपयोग नही करना चाहिए इसका सेवन 7 दिन से अधिक नही करना चाहिए |
  • चिकित्सक की देखरेख में सेवन करने से नुकसान होने की सम्भावना काफी हद तक कम रहती है |

दमाबेल का चूर्ण कहा मिलेगा

काफी आयुर्वेद फार्मेसी इसका चूर्ण बनाकर बेचती है | जहा से आप आसानी से इसका चूर्ण मंगवा सकते हो | हमारे द्वारा भी दमबेल का चूर्ण उपलब्ध करवा जाता है |

नोट:- किसी भी आयुर्वेद औषधि का सेवन चिकित्सक की देखरेख में ही करे |

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