सिद्ध मकरध्वज वटी – शीघ्रपतन (यौन) रोगों की रामबाण औषधि

मकरध्वज वटी के फायदे

परिचय :-

सिद्ध मकरध्वज वटी का नाम आते ही इन्सान को समझ आ जाता है की शारिरिक व जननेन्द्रियो की पुष्टि के लिए सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधि | इसके फायदों के बारे में जानने के लिए आज की आधुनिक जीवनशैली में सभी को उत्सुकता रहती है जिसका बड़ा कारण आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न हुई शारिरिक कमजोरी के परिणामस्वरूप सेक्सुएल हेल्थ की कमजोरी है |

मकरध्वज वटी के फायदे

जब बात सिद्ध मकरध्वज वटी के फायदे की आती है तो यह सम्पूर्ण धातुओ का पोषण करने से सभी प्रकार के जीर्ण रोगों जैसे- शारिरिक व् मानसिक रोगों में लाभदायक सिद्ध होती है |

सिद्ध मकरध्वज वटी को महौषधि के नाम से भी जाना जाता है जिसका सबसे बडा कारण उसकी महत्वपूर्ण उपयोगिता ही है | सिद्ध मकरध्वज  वटी का सेवन आयुर्वेद चिकित्सको द्वारा अलग अलग योगो में रोग और रोगी की अवस्था के अनुसार करवाया जाता है | जिससे रोगी को कम समय में ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो जाता है |

सिद्ध मकरध्वज वटी बनाने के लिए उपयोगी घटक द्रव्य

सुवर्ण रजतं लौह कस्तूरी मोत्तिकम तथा |

जातीफ़लं च सर्वेषां प्रत्येकं तुल्य्भागिकम ||

लौहाच्य द्विगुणमदेयम भस्मसूतं भिषग्वरै |

तत्तुल्य चन्द्रसंज्ञ च प्रवाल च तथैव च ||

सहस्त्रपुटितं चाभ लोहाच्चतुर्गुणम मतम |

सर्वद्रव्यसमं देयम मकरध्वजचुर्णितं ||

वारिणाम वटिका: कृत्वा भक्षयेच्च्य विधानत |

सर्वरोगहरि ह्येषा नास्ति कार्या विचारणा ||

वातपित्तोद्भवम वापी श्लेष्माणा च विशेषत |

आर्द्र्कस्य रस श्चानु सन्निपातविनाशन ||

प्राकृम वैकृतं द्वद्वम त्रिदोषम  च विनाशयेत |

उन्मादम चानेविधमज्ञानं वाड्निरोधकम ||

कांतिपुष्टिकरी ह्येषा वलितपलितनाशनी |

मकरध्वज वटी ख्याता नाम्ना च भाषिता स्वयं || (भैषज्य रत्नावली)

  • स्वर्ण भस्म
  • रजत भस्म
  • कस्तूरी
  • स्वर्ण बंग
  • मोती भस्म
  • पारद
  • मकरध्वज
  • जायफल
  • शतावरी
  • जल

सिद्ध मकरध्वज वटी बनाने की विधि siddha makardhwaj vatimanufacturing prosses in hindi

उपरोक्त सभी घटक द्रव्यों को निर्देशित मात्रा में लेकर महीन चूर्ण बना लिए जाता है | उसके बाद सभी भस्मो को एक साथ मिलाकर अच्छे से मर्दन किया जाता है |

जब भस्मे अच्छे से मिल जाये उसके बाद सभी औषधियों के चूर्ण को भस्मो के साथ खरल में अच्छे से मिलाकर उनका मर्दन करे |

सभी औषधियों का अच्छे से मर्दन हो जाने के बाद जल मिलाकर अच्छे से मर्दन करे | अच्छी तरह से खरल में म्र्द्दं करने के बाद 250-250 mg की गोलिया बनाकर सुखा ले | जब गोलिया अच्छे से सूख जाये तब किसी कांच की बोतल में सुरक्षित रखे | और सेवन करे |

सिद्ध मकरध्वज वटी के फायदे (makardhwaj benefits in hindi )

  • शीघ्रपतन में सिद्ध मकरध्वज वटी अत्यंत ही लाभदायक आयुर्वेद औषधि है |
  • नपुंसकता को दूर करने में सिद्ध मकरध्वज वटी के फायदे के बारे में प्रत्येक आयुर्वेद से सम्बंधित व्यक्ति को गुणगान करते हुए आसानी से सुना जा सकता है जब यह औषधि इतनी प्रिय होने के बाद आप समझ ही सकते है इसकी उपयोगिता के बारे में |
  • शुक्राणुओं की कमी को दूर करने में सिद्ध मकरध्वज वटी के फायदेबहुत ही कम समय में देखने को मिल जाते है |
  • सिद्ध मकरध्वज वटी नाड़ी संस्थान को मजबूत बनाता है जिससे हृदय को भी मजबूती मिलती है |
  • कोलेस्ट्रोल के नियन्त्रण में उपयोगी साबित होता है |
  • शारिरिक दुर्बलता को दूर करता है |
  • इसका सेवन बुढ़ापा रोकने में सक्षम है |
  •  रक्त संचार को नियमित बनाये रखने से सेक्सुअल टाइम को बढ़ाता है |
  • रोगप्रतिरोधक क्षमता को शीघ्र बढ़ाने में सक्षम |
  • अश्वगंधा आदि औषधियो के साथ सेवन करने से वजन बढ़ाने में उपयोगी सिद्ध होता है |
  • चेहरे की झुर्रियो को मिटाने में लाभकारी
  • चेहरे को कान्तिमान बनाने में उपयोगी |
  • असमय बालो का सफेद होना |
  • महौषधि की उपाधि होने से सभी प्रकार के जीर्ण रोगों में लाभदायक |
  • मिर्गी
  • अपस्मार
  • एनीमिया

सिद्ध मकरध्वज वटी के नुकसान

आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में सिद्ध मकरध्वज वटी का सेवन करने से किसी भी प्रकार के उपद्र्व्य सामने नही आते है किन्तु स्वम् रोगी द्वारा औषधि की मात्रा का निर्धारण करके सेवन करने से बदहजमी , अपच, मितली आना आदि उपद्रव होने के सम्भावना रहती है |

सेवन विधि

अन्य धातु पोष्टिक दवाओ के साथ सेवन करना अधिक लाभदायक रहता है | शहद , दूध , उष्ण जल आदि के साथ या चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन कर सकते है | यह भी पढ़े (अश्वशक्तिवर्धक ग्रैनुल्स )

विशेष -: किसी भी आयुर्वेदिक रसोषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करे | जिससे किसी भी प्रकार के उपद्र्व्य से बचा जा सके |

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