कही आपको थायराइड तो नही जाने थायराइड के कारण, प्रकार, लक्षण व उपचार

थायराइड के लक्षण व उपचार

थाइरायड (गण्डमाला)

आयुर्वेद में थाइरायड का वर्णन गण्डमाला रोग के नाम से किया गया है | आयुर्वेद में इसे अवटु:ग्रंथि के नाम से जाना जाता है | जो की वर्तमान समय में महामारी की तरह विकराल रूप धारण कर चुका है | पुरुषो की अपेक्षा महिलाओ में थाइरायड होने की सम्भावना 10 गुना अधिक रहती है | थाइरायड हमारे गले में उपस्थित एक ग्रंथि होती है जिसका मुख्य कार्य हार्मोन्स का नियन्त्रण व उत्सर्जन होता है |

थायराइड के लक्षण व उपचार

थाइरायड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन्स का मुख्य कार्य हमारे शरीर में मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करना होता है | शुरुआती दौर में हम थाइरायड के लक्षणों से अनजान होने की वजह से इसे पहचान ही नही पाते और समस्या धीरे-धीरे बढती जाती है | इसलिए हमे चाहिए की इस भयंकर समस्या को शुरुआती दौर में पहचान कर इसका समय से इलाज लिया जाये | आज इस लेख में विस्तार से चर्चा करेंगे थायराइड के लक्षण व उपचार के बारे में सरल भाषाशैली में |

थाइरायड क्या होता है (What is thyroid in hindi)

मानव शरीर में पाई जाने वाली सबसे बड़ी बड़ी अंत:स्त्रावी ग्रंथि होती है जिसे अवटू ग्रंथि कहा जाता है | आयुर्वेद में थाइरायड को अवटू:ग्रंथि शोथ के नाम से परिभाषित किया गया है | जो थायराक्सिन(T4), ट्राई-आयडोथायरोनीन(T3), व थायरोकैल्सीटोनिन नामक हार्मोन्स की उत्पत्ति करने का कार्य करती है |  जो कार्बोहायड्रेट, वसा, प्रोटीन आदि के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने में सहायक होते है | इसकी अत्यधिक क्रियाशीलता से हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है | वंही दूसरी और अवटु:ग्रंथि(Thyroid gland) की कम क्रियाशीलता से हाइपोथायराइडिज्म की समस्या उत्पन्न हो जाती है |

“25 मई को विश्व थाइरायड दिवस के रूप में मनाया जाता है |”

थाइरायड के कारण (casuas of thyroid in hindi)

थाइरायड  होने का सबसे बड़ा कारण अनुवांशिक होता है | किन्तु इस बात से भी नही नकारा जा सकता की थाइरायड रोग असंतुलित दिनचर्या से होता है | असंतुलित दिनचर्या थाइरायड  होने का सबसे बड़ा कारण माना जा सकता है | असंतुलित दिनचर्या के चलते थाइरायड ग्रंथि में आई असामान्यता के कारण थाइरायड ग्रंथि हार्मोन्स पर अपना नियन्त्रण खो देती है | जिससे हार्मोन्स का कम या ज्यादा स्त्रावित होना प्रारम्भ हो जाता है |  हार्मोन्स के कम-ज्यादा स्त्रावित होने की वजह से मेटाबोलिज्म पर अपना नियन्त्रण खो देती है और थाइरायड रोग की उत्पत्ति हो जाती है |

थाइरायड के प्रकार  (Types of Thyroid in Hindi)

यह मुखत: दो प्रकार का होता है | थाइरायड रोग के प्रकारों को आगे लक्षणों के साथ समझते है ये किस तरह एक दुसरे से भिन्न होते है और इनकी रोकथाम कैसे कर सकते है |

महिलाओ में थाइरायड रोग के लक्षण (Thyroid Symptoms IN Female in hindi)

  • महिलाओ के चेहरे पर बालो का उगना
  • कम शारिरिक श्रम के बाद भी अधिक थकान महसूस हों
  • छोटी सी समस्या पर भी घबराहट होना
  • अपने काम के प्रति उत्साह की कमी होना
  • हर कार्य को करने से पहले ही उसके नकारात्मक परिणामो के बारे में विचार आना
  • मासिकधर्म का अनियमित आना 

  • हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण (Symptoms of Hyperthyroidism in hindi)

यह थाइरायड ग्रंथि में होने वाली सबसे बड़ी समस्या है जिसका सबसे बड़ा कारण है ऑटोइम्यून थाइरायड रोग जो वंशानुगत होने की सम्भावना अधिक रहती है | इसमे प्रकार के थाइरायड में रोगी व्यक्ति का वजह बढने लगता है | साथ ही उसे थोडा सा शारीरक श्रम करने पर ही बहुत अधिक थकान होने लगती है | हाइपरथायराइडिज्म में हमारा शरीर एंटीबाडी का निर्माण अधिक करता है जिसके दुष्परिणामस्वरूप हमारे शरीर में हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगते है | जिससे वजन बढने से ओस्टियोपोरोसिस व् फ्रेक्चर होने की सम्भावना भी काफी हद तक बढ़ जाती है | हाइपरथायराइडिज्म से पीड़ित महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या भी देखी जा सकती है |

  • हाइपोथायराइडिज्म के लक्षण (Symptoms of Hypothyroidism in hindi)

इस समस्या में रोगी व्यक्ति का वजन घटता जाता है | हेल्दी डाइट लेने के बाद भी खाया पिया शरीर में नही लग रहा हो ऐसे में थाइरायड जाँच करवा लेना समझदारी होती है | इस प्रकार के थाइरायड के लक्षणों में वजन घटना, स्किन का रूखापन, धुप सहन नही होना, गर्मी जरूरत से अधिक लगना, कब्ज रोधी दवाओ के सेवन के बाद भी कब्ज बनी रहना , नींद का नही आना, जरूरत से अधिक आलस्य, थकान, बैचेनी होना, मासिकधर्म की अनियमितता, व बांझपन की समस्या का होना हाइपोथायराइडिज्म के उपद्रव होते है |

थाइरायड रोग का आयुर्वेद इलाज (Ayurveda Treatment of Thyroid in hindi )

थाइरायड रोग (thyroid ka ilaaj in hindi) की रोकथाम के लिए आयुर्वेद व योग से बेहतर चिकित्सा कोई होई नही सकती है | आयुर्वेद शास्त्रों में थाइरायड रोग का वर्णन गण्डमाला रोग के नाम से किया गया है |  

  • गण्डमाला खंडन रस
  • वृद्धिवाधिका वटी
  • शिला सिन्दूर
  • रस पर्पटी
  • कांचनार गुग्गुल
  • पंचतिक्त घृत गुग्गुल
  • कुमारीआसव
  • पत्रांगासव
  • सितोपलादि चूर्ण
  • पंचसकार चूर्ण
  • मंजिष्ठादी चूर्ण आदि का सेवन चिकित्सक के परामर्श के बाद सेवन करने से लाभ हो जाता है |

थाइरायड रोग के नियन्त्रण के लिए संतुलित दिनचर्या

प्रात: 5 बजे उठकर शोचादि कार्यो से निवृत होकर कम से कम 3 किमी पैदल चले | तदुपरांत योगाभ्यास करे |

थाइरायड रोग के लिए उपयोगी योग (yoga for thyroid in hindi)

  1. भुजंगासन
  2. सर्वांगासन
  3. मर्कटासन
  4. जालंधर बंध /उड्डियान बंध
  5. हलासन
  6. अर्धहलासन
  7. हलासन
  8. कुक्कुटासन
  9. होरा
  10. भ्रामरी
  11. षड्मुखी भ्रामरी
  12. ग्रीवा संचालन
  13. कुंजल
  14. सूर्यनमस्कार
  15. मार्जरी आसन
  16. बालकासन
  17. योगनिद्रा
  18. ध्यान (मैडिटेशन)

आदि का अभ्यास किसी योग प्रशिक्षक से प्रशिक्षण लेकर प्रारम्भ करे | बेहतर होगा यदि योग प्रशिक्षक की देखरेख में योगाभ्यास किया जाये |

थाइरायड रोग में आहार चिकित्सा (Diet Therapy in thyroid in hindi)

प्रात: काल चाय के सेवन को त्यागते हुए मोषमी फल सब्जियों में से क्षारीय प्रवृति के फल सब्जियों का चयन अपने सुबह के नास्ते में शामिल करना चाहिए | थायराइड वाले रोगी को चाहिए की वह दोपहर 12 बजे तक केवल फल सब्जियों पर ही रहे अन्न ग्रहण ना करे | आवले का सेवन सप्ताह में दो दिन रस के रूप में करे | कोशिश करे की आंवले के ताज़ा रस का ही सेवन किया जाये |

क्षारीय फल , सब्जिया थायराइड में फायदेमंद

 प्रात: काल घूमते हुए अमरुद या काचनार के पत्तो को चबाना अत्यंत लाभदायक रहता है | इनकी क्षारीय प्रवृति के कारण ये थाइरोइड की रोक थाम में बहुत कारगर साबित होते रहे है
आवले, जामून , खजूर, अनार, अमरुद,  ग्वारफली, मटर, परवल, नारियल, मूंगफली, काली मिर्च , छोटी इलायची , अजवायन, धनिया, लालमिर्च, जीरा, गेंहू के ज्वारे का ताज़ा रस, मोठ, अरहर, कुल्थी, लोबिया, उड़द, फालसा, आलू भुखारा, पका टमाटर, नाशपाती, लीची, तरबूज आदि का सेवन लाभदायक रहता है |

थायराइड रोग में क्या नही खाए

अवटु:ग्रंथि शोथ वाले रोगी को बेसन, मैदा, डिब्बाबंद भोजन, दिन में सोना, आलू, जमीकंद, आम, आदि का सेवन नही करना चाहिए |

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