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Urinal Diseases Best Ayurvedic Medicines – मूत्र रोगों की 10 बेस्ट आयुर्वेदिक मेडिसिन

Urinal Diseases (मूत्र रोगों) की 10 बेस्ट आयुर्वेदिक मेडिसिन: मूत्र रोग हमारे शरीर के मूत्रमार्ग की समस्याएं होती हैं। ये समस्याएं पेशाब के बारे में नियमित रूप से होती हैं, जिससे व्यक्ति को आराम नहीं मिलता। इन रोगों का समाधान आयुर्वेद में भी मौजूद है।

urinal disease

यहां हम आपको 10 सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक दवाओं की सूची प्रस्तुत करेंगे, जो मूत्र रोगों के इलाज में मदद कर सकती हैं।

Urinal Diseases 10 सबसे बेस्ट आयुर्वेदिक दवाएं निम्न हैं

1. पुनर्नवा चूर्ण (Punarnava Powder)

यह दवा मूत्रमार्ग (Urinal Diseases) की समस्याओं में लाभदायक है। इसके नियमित सेवन से मूत्र में खून आने, पेशाब में जलन और संबंधित समस्याएं कम हो सकती हैं। लेने की विधि: 3 ग्राम पुनर्नवा चूर्ण को गर्म पानी के साथ रोजाना दो बार खाएं।

2. गोक्षुरादि गुग्गुलु (Gokshuradi Guggulu)

यह दवा मूत्र की समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है। इसमें गोक्षुर, अमला, गुग्गुलु आदि जड़ी बूटियों का मिश्रण होता है। लेने की विधि: 1 गोली दिन में दो बार भोजन के बाद खाएं।

3. वरुणादि क्वाथ (Varunadi Kwath)

यह क्वाथ मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभकारी है। इसमें वर्णा, दारुहल्दी, गोखरू, पतोलादि जड़ी बूटियां होती हैं। लेने की विधि: 20 मिलीलीटर क्वाथ को बर्तन में डालकर इसे गर्म करें, फिर इसे दो बार रोजाना खाएं।

4. कास्यादि चूर्ण (Kasyadi Powder)

यह चूर्ण मूत्र संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है। इसमें कास्य, सौंठ, मिश्री आदि घटक होते हैं। लेने की विधि: 5 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में दो बार खाएं।

5. चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati)

यह चंद्रप्रभा वटी मूत्र संबंधी समस्याओं (Urinal Diseases) में सकारात्मक प्रभाव डालती है। इसमें गुडूचि, अमलकी, हरितकी आदि जड़ी बूटियां होती हैं। लेने की विधि: 2 गोली दिन में दो बार पानी के साथ खाएं। यहाँ पढ़े – चंद्रप्रभा वटी के फायदे

6. यवागुदुच्यादि चूर्ण (Yavaguchyadi Churna)

यह चूर्ण मूत्र संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है। इसमें यवागुदुच्या, सौंठ, जीरक आदि घटक होते हैं। लेने की विधि: 3 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में दो बार खाएं।

7. पाषाणभेद चूर्ण (Pashanbhed Powder)

यह दवा मूत्रमार्ग संबंधी समस्याओं में उपयोगी है। इसमें पाषाण भेद, अम्बुज, कच्च्या आदि घटक होते हैं। लेने की विधि: 2 ग्राम चूर्ण को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ खाएं।

8. कुंभाजत्वदि क्वाथ (Kumbhajtvadi Powder)

यह क्वाथ मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभकारी है। इसमें कुंभाजत्वद, दारुहल्दी, वासा आदि जड़ी बूटियां होती हैं। लेने की विधि: 20 मिलीलीटर क्वाथ को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ खाएं।

9. मुत्रकृच्छ्र क्वाथ (Mutrakrichh Kwath)

यह क्वाथ मूत्र संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। इसमें मुत्रकृच्छ्र, अम्बुज, वासा आदि जड़ी बूटियां होती हैं। लेने की विधि: 20 मिलीलीटर क्वाथ को बर्तन में डालकर इसे गर्म करें, फिर इसे दो बार रोजाना खाएं।

10. कटुमार्द्दन रस (Katumardan Rasa)

यह रस मूत्र संबंधी समस्याओं में सहायक होता है। इसमें कटुमार्द्दन, त्रिकटु, पाषाण भेद आदि घटक होते हैं। लेने की विधि: 2 गोली दिन में तीन बार पानी के साथ खाएं।

मूत्र रोग कौन कौनसे होते हैं और इनका नेचुरल ट्रीटमेंट कैसे किया जा सकता है:

1. यूरिन इन्फेक्शन:

यूरिन इन्फेक्शन को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) भी कहा जाता है। इसमें पेशाब करते समय जलन, बार बार पेशाब का अनियमित आवागमन और पेशाब में खून आना जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसे नेचुरल ट्रीट करने के लिए रोजाना कुछ ग्लास पानी पीना और केले, सेब, हरे पत्ते, तुलसी की चाय पीना फायदेमंद होता है।

2. मूत्रश्यायता:

मूत्रश्यायता में पेशाब को रोक पाना या नियमित पेशाब आवागमन की समस्या होती है। इसके लिए प्रतिदिन तुलसी के पत्ते खाना फायदेमंद होता है।

3. मूत्र संक्रमण:

मूत्र संक्रमण एक अन्य रूप में मूत्र इन्फेक्शन ही होता है। इसे रोकने के लिए अनार का रस पीना, ताज़ा नारियल पानी पीना और सेब का मुरब्बा खाना लाभदायक होता है।

4. मूत्रमार्ग कीड़े:

मूत्रशोथक कीड़े मूत्रमार्ग के कीड़े होते हैं जो मूत्र इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं। इसके लिए नियमित रूप से तुलसी के पत्ते, अदरक का रस और नींबू पानी का सेवन करना फायदेमंद होता है।

5. मूत्रश्यायता का इलाज:

मूत्रश्यायता में सफलता के लिए प्रतिदिन 8 से 10 ग्लास पानी पीना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा खरबूजे, तरबूज, खीरे, ककड़ी आदि को भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

6. मूत्रकृच्छ्र:

मूत्रकृच्छ्र में नियमित रूप से गर्म पानी का सेवन करना फायदेमंद होता है। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी पीना शुरू करें।

7. मूत्र संबंधी संक्रमण से बचाव:

मूत्र संबंधी संक्रमण से बचाव के लिए साफ़ पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें, हमेशा साफ़ और सुखे जगह पर बैठे और बार बार पेशाब करने का अभ्यास करें।

8. मूत्र पथ के संक्रमण संबंधी समस्याएं:

मूत्रपुरिष संबंधी समस्याओं में सेब का सेवन फायदेमंद होता है। सेब में मूत्रकण की सफाई के गुण होते हैं जो मूत्रपुरिष को स्वस्थ रखते हैं।

मूत्रशोधक पौधे हैं ये –

मूत्रशोधक पौधे जैसे की तुलसी, अदरक, नींबू, पालक आदि को अपने घर में लगाएं। ये पौधे मूत्र संबंधी समस्याओं से बचने में मदद करते हैं।

मूत्रश्यायता के लिए योगासन

योगासन जैसे की पवनमुक्तासन, वज्रासन, भुजंगासन आदि मूत्रश्यायता को दूर करने में सहायक होते हैं। योगासन को नियमित रूप से करने से मूत्रमार्ग की समस्याएं कम हो सकती हैं।

टिप्स:

1. नियमित रूप से पानी पीना बेहद महत्वपूर्ण है। कम से कम 8-10 ग्लास पानी प्रतिदिन पीने से मूत्रमार्ग की समस्याएं कम हो सकती हैं।

2. दूध और दूध से बनी चीजों को अधिक से अधिक सेवन करें। दूध मूत्रमार्ग को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

3. तुलसी, अदरक, नींबू और खरबूजे को नियमित रूप से खाने और उनके रस का सेवन करने से मूत्रमार्ग की समस्याएं कम हो सकती हैं।

4. मूत्र संबंधी समस्याओं को नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करना फायदेमंद होता है।

5. तली हुई, तले गए और खीरे का रस जैसी समस्याएं मूत्रमार्ग को ठीक करने में मदद कर सकते हैं।

6. भुजंगासन, पवनमुक्तासन और वज्रासन जैसे योगासन मूत्रमार्ग की समस्याएं कम करने में सहायक होते हैं।

7. मूत्रमार्ग संबंधी समस्याओं में गर्म चीजों के सेवन से बचें। गर्मी के मौसम में ठंडे पानी, नारियल पानी और फलों का सेवन करने से लाभ होता है।

Conclusion:

आयुर्वेद में मूत्र रोगों के इलाज के लिए कई प्राकृतिक औषधियां उपलब्ध हैं जो बिना किसी नकारात्मक प्रभाव के मूत्रमार्ग की समस्याओं को ठीक कर सकती हैं। यह औषधियां मूत्र संबंधी विभिन्न समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकती हैं और स्वास्थ्यपूर्ण जीवन के लिए आपको एक सकारात्मक राह दिखा सकती हैं। लेकिन यदि आपको किसी गंभीर मूत्र संबंधी समस्या का सामना करना है, तो हमेशा अपने नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें और उनके सुझावों का पालन करें। स्वस्थ रहने के लिए आहार और योग भी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इन नियमों का पालन करते रहें और स्वस्थ जीवन जीने का आनंद लें।

Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

Written by

Dr Ramhari Meena

Founder & CEO - Shri Dayal Natural Spine Care. Chairmen - Divya Dayal Foundation (Trust) Founder & CEO - DrFindu Wellness

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