भृंगराज क्या है ? भृंगराज के फायदे

KESH DAYAL HERBAL HAIR LEP

परिचय

भृंगराज आस्टेरेसी कुल का पोधा है | भृंगराज को अनेको नाम जैसे भांगरा, केशराज, अवन्ती, गर्ग, गुंटकल, मन्नकान्नुनी, हरिवास, हरिप्रिय, केसुटी, false jaisy (Eclipta ) आदि नामों से जाना जाता है | भृंगराज का लैटिन वैज्ञानिक नाम Eclipta Prostrata Linn है | यह मुख्यत: पानी के भराव स्थानों के आसपास उगता है | भृंगराज विश्वभर के अनेको देशो में बहुतायत से पाया जाता है | इसीलिए भृंगराज के फायदे अनगिनत है |

भृंगराज के फायदे
भृंगराज के फायदे

         जब भृंगराज का नाम आता है, तो सीधे दिमाग में एक ही बात सामने आती है की भृंगराज बालो के लिए उपयोगी पोधा है किन्तु भृंगराज लीवर आदि अनेको रोगों में लाभकारी साबित हुआ है |

भृंगराज में रासायनिक संगठन

           भृंगराज पञ्चांग में रेजिन, सीटोस्टेरोल, ग्लायकोसाइड, ऑलिएनॉन, वेडेलोलेक्टोंन, एकलेप्टिन, म्युसिलेज, खनिज, A-टरपीन, हेन्ट्रीएकोन्टानोल, B-एमायरिन आदि बहुतायत से पाए जाते है |

भृंगराज के फायदे ( bhringraj benefitS in hindi )

बालो का झड़ना (खालित्य) व बालो का पकना (पालित्य) में भृंगराज के फायदे

भृंगराज, आवला व अमरबेल को सरसों के तेल में अच्छे से उबाल ले और छान कर रख ले | रोज बालो में उपयोग करने से बालो का झड़नाबालो के पकने दोनों में लाभदायक साबित होता है |

         भृंगराज का उपयोग उस स्थान पर अवश्य करे जहा से बाल बिलकुल ही कम हो चुके हो ऐसे स्थान पर भृंगराज स्वरस की अच्छे से मालिश करने से कुछ ही दिनों में बाल नजर आने लगते है |

आधासीसी ( migrain ) में भृंगराज के फायदे ( bhringraj benefit for migrain in hindi )

     2 मिली भृंगराज के रस में 2 मिली बकरी के दूध में मिलाकर हल्का गर्म कर ले व मुह पर हल्का भाप स्नान लेकर 4-4 बूँद दोनों नाको में टपकने से आधासीसी का दर्द ठीक हो जाता है |

        20 ग्राम कालीमिर्च पाउडर में 10 मिली भृंगराज स्वरस डालकर लेप बनाकर सिर पर लगाने से आधासीसी में राहत  मिलता है

भृंगराज के फायदे लीवर रोगों में ( bhringraj benefits for liver disorder in hindi )

       लीवर सम्बन्धी रोगों में भृंगराज के रस व् पुनर्नवा स्वरस को 5-5 बूंद छाछ के साथ देने से राहत मिलती है |

दुष्ट व्रण या पुराने घाव में भृंगराज के फायदे

     भृंगराज पत्र, अपामार्ग पत्र व चक्रमर्द के पत्तो को समान मात्रा में लेकर चटनी बनाकर पुराने घाव पर लगाने से कुछ ही दिनों में घाव ठीक होने लगता है |

भृंगराज है बेहतरीन रसायन का विकल्प

भृंगराज चूर्ण व समान भाग मिश्री मिलाकर रोग दूध के साथ सुबह शाम सेवन करने से कृशता अर्थात दुबलापन दूर होकर शरीर पुष्ट होता है | भृंगराज एक ओजवर्द्धक रसायन का कार्य करता है |

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